Monday, September 7, 2026
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भर्ती सुधार और नकल विरोधी कानून से बढ़ा विश्वास, छात्रसंघ चुनावों में युवाओं ने धामी सरकार के पक्ष में दिया जनादेश  

भर्ती सुधार और नकल विरोधी कानून से बढ़ा विश्वास, छात्रसंघ चुनावों में युवाओं ने धामी सरकार के पक्ष में दिया जनादेश

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पेपर प्रकरण और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर विपक्ष व कुछ संगठनों ने लगातार सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। इस बात को उछाला गया कि प्रदेश का युवा वर्ग सरकार से नाराज है और उसके खिलाफ सड़क पर उतर चुका है। लेकिन प्रदेश के 100 से अधिक महाविद्यालयों में हुए छात्रसंघ चुनावों के नतीजे इस धारणा से बिल्कुल उलट तस्वीर पेश करते हैं।

ABVP भाजपा का आनुषंगिक संगठन है, और संगठनात्मक दृष्टि से भाजपा की जड़ें विश्वविद्यालय और कॉलेज कैंपसों तक फैली हुई हैं। ऐसे में यूकेएसएसएससी के पेपर प्रकरण सामने आने के बाद यह बात उठने लगी कि इस बार चुनाव में युवा अपनी वोट की ताकत से भाजपा को जवाब देगी, इन चुनाव में भाजपा की हार निश्चित है। लेकिन छात्रसंघ चुनाव में मिली भारी जीत यह पुख्ता करती है कि छात्रों के बीच भाजपा और उसकी सरकार को लेकर कोई व्यापक नाराजगी नहीं है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को मिली बड़ी और ऐतिहासिक जीत ने स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश के कॉलेज और विश्वविद्यालयों के छात्र, खासकर GenZ, भाजपा की विचारधारा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों पर भरोसा रखते हैं। चुनाव परिणाम यह भी बताते हैं कि छात्रों के बीच सरकार के प्रति विश्वास की स्थिति विपक्ष के आरोपों से कहीं अलग है।

सीएम धामी के नेतृत्व में सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और नकल पर कठोर नियंत्रण के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। नकल विरोधी कानून, भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी निगरानी और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे फैसले युवाओं को यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुन रही है और समाधान के लिए सख्त कदम उठाने को तैयार है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ABVP की यह जीत केवल संगठनात्मक शक्ति या चुनावी रणनीति का परिणाम नहीं है, बल्कि यह युवाओं के उस भरोसे का प्रतीक है जो उन्हें सरकार की नीतियों और कामकाज पर है। विपक्ष ने भले ही छात्रों को आंदोलनों के माध्यम से सरकार को घेरने की कोशिश की हो, लेकिन छात्रसंघ चुनावों के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि युवाओं ने सरकार की नीयत और नीतियों को ज्यादा महत्व दिया।

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