Sunday, May 3, 2026
HomeDehradunधामी के फैसले की गूंज, अब गुजरात में भी UCC की तैयारी

धामी के फैसले की गूंज, अब गुजरात में भी UCC की तैयारी

 

धामी के फैसले की गूंज, अब गुजरात में भी UCC की तैयारी

गुजरात सरकार ने UCC 2026 बिल का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। लिव-इन रिलेशनशिप रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, बहुविवाह पर रोक, समान उत्तराधिकार नियम। अनुसूचित जनजाति को छोड़कर सभी पर लागू
उत्तराखंड की तर्ज पर गुजरात सरकार भी समान नागरिक संहिता लागू करने जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) 2026 बिल का ड्राफ्ट तैयार किया है। बिल में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसी व्यक्तिगत कानूनी बातों को एक समान नियम में लाने की कोशिश करता है। इस बिल में अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों पर कोई प्रावधान लागू नहीं होंगे। बाकी सभी नागरिकों के लिए ये नियम एक जैसे होंगे, चाहे उनकी कोई भी धर्म, जाति या लिंग हो।

लिव-इन रिलेशनशिप पर मुख्य प्रावधान

बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को रजिस्टर कराना अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। दोनों पार्टनर को अपने जिले के रजिस्ट्रार के पास जाकर लिव-इन रिलेशनशिप का स्टेटमेंट देना होगा। अगर रिश्ता खत्म हो जाए तो उसकी भी सूचना देनी होगी। लिव-इन से पैदा हुआ कोई भी बच्चा दंपति का वैध बच्चा माना जाएगा। अगर महिला को उसका लिव-इन पार्टनर छोड़ दे तो वह मेंटेनेंस का हकदार होगी।

शादी और तलाक के नियम

शादी की न्यूनतम उम्र पुरुष के लिए 21 साल और महिला के लिए 18 साल रखी गई है। शादी किसी भी धर्म के रीति-रिवाज से की जा सकती है, लेकिन शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। अगर कोई रजिस्ट्रेशन नहीं कराता तो 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। इसके साथ ही बिल में बहुविवाह (पॉलीगमी) पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे 7 साल तक की जेल हो सकती है। जबरदस्ती या धोखे से शादी कराने पर भी 7 साल तक की सजा और जुर्माना का प्रावधान है।

तलाक के बाद फिर से शादी करना बिना किसी शर्त के वैध होगा। इसमें पहले किसी तीसरे व्यक्ति से शादी (जैसे हलाला की प्रथा) करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करे तो 3 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

उत्तराधिकार के नियम

अगर कोई बिना वसीयत के मर जाता है तो उसके वारिसों को तीन क्लास में बांटा गया है। वर्ग 1 में पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता हैं, वहीं वर्ग 2 सौतेले माता-पिता, नाना-नानी, दादा-दादी हैं, बाकी सारे रिश्तेदार तीसरी श्रेणी में आते हैं।

बिल कैसे तैयार हुआ

राज्य सरकार ने रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने अलग-अलग समुदायों और स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंपी गई।

बुधवार को कैबिनेट ने इस ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी और इसे विधानसभा के मौजूदा सत्र में पेश करने के लिए भेज दिया गया है। बिल के उद्देश्य में कहा गया है कि यह समानता, न्याय और सद्भाव लाने के लिए है। इससे सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार जैसी बातों में एक समान कानूनी ढांचा बनेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments