Saturday, September 5, 2026
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उत्तराखंड पुलिस की निष्पक्ष जांच ने खोला सच!चंपावत मामला निकला सुनियोजित साजिश,अब झूठ फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

उत्तराखंड पुलिस की निष्पक्ष जांच ने खोला सच!चंपावत मामला निकला सुनियोजित साजिश,अब झूठ फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

 

उत्तराखंड के चंपावत में चर्चित दुष्कर्म प्रकरण को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की वैज्ञानिक, तकनीकी और फॉरेंसिक जांच में मामला पूरी तरह संदिग्ध और सुनियोजित षड्यंत्र के रूप में सामने आया है। जिस मामले को लेकर विपक्ष और कुछ लोगों ने सरकार को घेरने की कोशिश की, अब उसी मामले में पुलिस जांच ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर कर दिए हैं।

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 6 मई 2026 को कोतवाली चंपावत में एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक चंपावत रेखा यादव के निर्देशन में 10 सदस्यीय एसआईटी टीम गठित की गई और तत्काल वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की गई।

जांच में सामने आया कि कथित पीड़िता घटना वाले दिन अपनी इच्छा से अपने दोस्त के साथ विवाह समारोह में गई थी। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और तकनीकी साक्ष्यों से उसकी गतिविधियों की पुष्टि हुई। मेडिकल परीक्षण में किसी भी प्रकार के संघर्ष, चोट या जबरदस्ती के संकेत नहीं मिले।

सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिन तीन लोगों पर आरोप लगाए गए थे, वे घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे। तकनीकी साक्ष्य और गवाहों के बयान से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया। वहीं जांच में कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच लगातार संपर्क भी सामने आया, जिसने पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

पुलिस जांच के अनुसार, कमल रावत ने बदले की भावना से नाबालिग को बहला-फुसलाकर यह पूरा घटनाक्रम रचा। यानी जिस मामले को लेकर सरकार और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए जा रहे थे, वह अब एक साजिश के रूप में सामने आ रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार लगातार महिला और बाल सुरक्षा को लेकर Zero Tolerance की नीति पर काम कर रही है। यही कारण रहा कि मामले को दबाने के बजाय तुरंत एसआईटी जांच बैठाई गई और हर पहलू की निष्पक्ष जांच कराई गई। अब जांच में सामने आए तथ्यों ने उन लोगों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है जिन्होंने बिना तथ्य जाने मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की उत्तराखंड पुलिस ने साफ किया है कि महिला अपराधों के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, लेकिन झूठे आरोप और भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ आगे विधिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है

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